Aging myths: उम्र के मिथ: सही ट्रेनिंग से 50 के बाद भी रहें फिट,एक्टिव और युवा

Anita Khatkar
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Aging myths: अगर आप युवावस्था से ही उम्र बढ़ने को लेकर नकारात्मक सोच रखते हैं, तो यह भविष्य में आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकता है। एक अध्ययन के अनुसार, जो लोग 20, 30 या 40 की उम्र में एजिंग को लेकर नकारात्मक विचार रखते हैं, उनमें 60 साल की उम्र तक याददाश्त में 30% तक की गिरावट आ सकती है। यह सच है कि उम्र के साथ शारीरिक और मानसिक क्षमताओं में गिरावट होती है, लेकिन सही सोच और लगातार अभ्यास से इन क्षमताओं को लंबे समय तक बरकरार रखा जा सकता है।

Aging myths: शरीर की क्षमता का सही मापन

मानव शरीर की क्षमता को मापने का एक महत्वपूर्ण संकेतक है VO2 Max, जो बताता है कि आपका शरीर एक्सरसाइज के दौरान कितनी ऑक्सीजन का उपयोग कर सकता है। उदाहरण के लिए, अगर आप सीढ़ियां चढ़ रहे हैं, तो आपकी VO2 Max क्षमता यह तय करती है कि आप कितनी सीढ़ियां चढ़ पाएंगे।

सामान्यत: 20 की उम्र के बाद VO2 Max में गिरावट आनी शुरू हो जाती है और 50 की उम्र के बाद यह गिरावट अधिक स्पष्ट होती है। हालांकि, एक 80 साल के एथलीट का VO2 Max स्तर 35 साल के स्वस्थ व्यक्ति के बराबर हो सकता है। इसका मतलब यह है कि सही ट्रेनिंग और अभ्यास से इस गिरावट को रोका जा सकता है।

Aging myths: शारीरिक और मानसिक क्षमता को बनाए रखना संभव

शरीर की तीन प्रमुख क्षमताओं को लंबे समय तक बनाए रखा जा सकता है- शारीरिक क्षमता, मांसपेशियों का विकास और मानसिक कुशलता। 50 की उम्र के बाद मांसपेशियों का फाइबर कम होने लगता है। लेकिन अगर सही ट्रेनिंग की जाए तो बची हुई मांसपेशियों के विकास से इस कमी को पूरा किया जा सकता है। यही कारण है कि कई मास्टर एथलीट्स बढ़ती उम्र के बावजूद उत्कृष्ट प्रदर्शन कर पाते हैं।

दिमागी कुशलता की बात करें तो इसमें याददाश्त, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और विंग मेमोरी शामिल होती है। उम्र के साथ आने वाली मानसिक गिरावट को सही शारीरिक और मानसिक प्रशिक्षण के जरिए रोका जा सकता है। मस्तिष्क जीवन भर लचीला बना रहता है, और इसे सही देखभाल से बेहतर किया जा सकता है।

Aging myths: सकारात्मक सोच से उम्र को मात दें

Aging myths: उम्र के मिथ: सही ट्रेनिंग से 50 के बाद भी रहें फिट,एक्टिव और युवा
Aging myths: उम्र के मिथ: सही ट्रेनिंग से 50 के बाद भी रहें फिट,एक्टिव और युवा

उम्र बढ़ने को लेकर सकारात्मक सोच आपके जीवन पर गहरा प्रभाव डाल सकती है। अगर आप खुद को उम्रदराज और कमजोर समझते हैं, तो इसका असर आपकी शारीरिक और मानसिक सेहत पर सीधा पड़ता है। लेकिन, शोध से पता चलता है कि अगर आप उम्र बढ़ने को लेकर सकारात्मक सोच रखते हैं तो इसका आपके स्वास्थ्य पर इतना अच्छा असर पड़ सकता है जितना धूम्रपान छोड़ने या मोटापा कम करने से होता है।

उम्र केवल एक संख्या है- यह कहावत सही है, बशर्ते आप अपनी सोच और अभ्यास में सकारात्मक बदलाव लाएं। सही ट्रेनिंग और सकारात्मक दृष्टिकोण से 50 के बाद भी आप शारीरिक और मानसिक रूप से युवा बने रह सकते हैं। उम्र को लेकर बनी धारणाओं को तोड़ें, अपनी क्षमताओं को पहचानें और लंबी उम्र तक एक सक्रिय और स्वस्थ जीवन जिएं।

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