JRD Tata Bharat Ratna: भारत रत्न से सम्मानित होने वाले इकलौते उद्योगपति, जिन्होंने बदली भारतीय उद्योग की तस्वीर

Anita Khatkar
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JRD Tata Bharat Ratna: जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा, जिन्हें हम JRD टाटा के नाम से जानते हैं, भारत के एकमात्र उद्योगपति हैं जिन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न से 1992 में नवाजा गया। उनकी उपलब्धियां न केवल उद्योग जगत तक सीमित थीं, बल्कि उन्होंने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई।

JRD Tata Bharat Ratna: JRD टाटा का ऐतिहासिक योगदान

29 जुलाई 1904 को पेरिस, फ्रांस में जन्मे JRD टाटा, 34 साल की उम्र में टाटा सन्स के चेयरमैन बने। 53 वर्षों तक अपने नेतृत्व में उन्होंने टाटा ग्रुप को 50 गुना बढ़ाया और भारतीय उद्योग जगत में टाटा को एक प्रमुख पहचान दिलाई। उनके कार्यकाल के दौरान 14 नई कंपनियों की स्थापना की गई, जिनमें टाटा मोटर्स, टाटा सॉल्ट और टाइटन जैसी जानी-मानी कंपनियां शामिल हैं।

JRD Tata Bharat Ratna: सिविल एविएशन के जनक

JRD टाटा भारत के सिविल एविएशन उद्योग के जनक माने जाते हैं। 1929 में, वह पहले भारतीय थे जिन्हें हवाई जहाज उड़ाने का लाइसेंस मिला। 1932 में उन्होंने टाटा एयरलाइंस की स्थापना की, जो बाद में एयर इंडिया बनी। दिलचस्प रूप से, एयर इंडिया अब एक बार फिर टाटा ग्रुप के अधीन है, जो उनकी विरासत को और मजबूत करता है।

कर्मचारियों के कल्याण के लिए पहल

JRD टाटा ने हमेशा अपने कर्मचारियों के हितों को प्राथमिकता दी। उन्होंने 1956 में टाटा प्रशासनिक सेवा (TAS) की स्थापना की, जो युवा प्रतिभाओं को उद्योग में नेतृत्व के लिए तैयार करती है। इसके अलावा, उन्होंने 8 घंटे का कार्यदिवस, मुफ्त चिकित्सा सुविधाएं, और भविष्य निधि योजना जैसी कई कल्याणकारी योजनाएं लागू कीं।

भारत रत्न से सम्मानित

भारत रत्न से सम्मानित होने वाले JRD टाटा अकेले उद्योगपति हैं। उन्हें 1992 में इस सम्मान से नवाजा गया। इस सम्मान को पाकर JRD ने कहा था कि वह चाहते हैं कि भारत सिर्फ आर्थिक महाशक्ति न बने, बल्कि एक खुशहाल और समृद्ध देश बने।

JRD Tata Bharat Ratna: भारत रत्न से सम्मानित होने वाले इकलौते उद्योगपति, जिन्होंने बदली भारतीय उद्योग की तस्वीर
JRD Tata Bharat Ratna: भारत रत्न से सम्मानित होने वाले इकलौते उद्योगपति, जिन्होंने बदली भारतीय उद्योग की तस्वीर

JRD Tata Bharat Ratna: विरासत और योगदान

29 नवंबर 1993 को जिनेवा में JRD टाटा का निधन हो गया, लेकिन उनकी विरासत आज भी जीवित है। उन्होंने कई संस्थानों की स्थापना की, जैसे टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज और टाटा मेडिकल सेंटर। उनका जीवन भारतीय उद्योग और समाज के प्रति एक प्रेरणा के रूप में हमेशा याद किया जाएगा।

JRD टाटा का योगदान न केवल उद्योग तक सीमित था, बल्कि उन्होंने भारत के विकास में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी दूर दृष्टि और नेतृत्व कौशल आज भी अगली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा के स्रोत बने हुए हैं।

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