Jind temperature : जींद में शुक्रवार को दिन भर और रात को बारिश के साथ ओलावृष्टि के बाद शनिवार को भी मौसम में बादलवाई रही। पिछले 24 घंटों में जिले में औसतन 22.2 एमएम बारिश हुई है, जिसमें सबसे ज्यादा जुलाना में 39 एमएम बारिश दर्ज की गई। उचाना क्षेत्र में देर शाम को हुई ओलावृष्टि से सरसों की फसल को नुकसान हुआ है।
अब चार दिन तक मौसम ठीक रहेगा लेकिन एक और दो जनवरी को फिर से बारिश की संभावना है।शनिवार को अधिकतम तापमान 18 डिग्री रहा तो न्यूनतम तापमान आठ डिग्री तक आने का अनुमान है। शुक्रवार शाम को उचाना के बड़ौदा, घोघड़ियां, रोज खेड़ा, खटकड़, खापड़, भौंगरा, बुडायन, बरसोला सहित कई गांवों में ओलावृष्टि हुई है। किसानों ने स्पेशल गिरदावरी करवाने की मांग प्रशासन से की है।
Jind rainfall report : इस ब्लाक में इतनी बारिश दर्ज
ब्लाक का नाम -बारिश एमएम में
जींद -20.2 एमएम
नरवाना -26
सफीदों -15
जुलाना -39
उचाना -21
पिल्लूखेड़ा -14
अलेवा -20.6
औसत -22.2 MM

गेहूं की फसल में एक सिंचाई कम होगी
बारिश से गेहूं की फसल को फायदा होगा। किसानों के अनुसार गेहूं की फसल में सिंचाई की पूर्ति हो गई है। इससे किसानों का प्रति एकड़ ट्यूबवेल से सिंचाई पर होने वाले 800 से एक हजार रुपये के डीजल खर्च की बचत हुई है। जिले से गुजरने वाली हांसी ब्रांच और सुंदर ब्रांच नहर में भी एक सप्ताह देरी से 13 जनवरी को पानी आना था। जिसके चलते किसानों को मजबूरन ट्यूबवेल से सिंचाई करनी पड़ती। लेकिन ऐसे समय पर वर्षा हुई है, जिससे किसानों को ट्यूबवेल से सिंचाई नहीं करनी पड़ेगी। इससे नहर में देरी से पानी आने का असर इस बार सिंचाई पर नहीं पड़ेगा।
जींद जिले में करीब 2.15 लाख हेक्टेयर में गेहूं की फसल खड़ी है। अगेती फसल में फिलहाल दूसरी बार सिंचाई का समय आ चुका था। वहीं पछेती फसल में किसानों को पहली सिंचाई करनी थी। अब वर्षा होने से सिंचाई की पूर्ति होने के साथ-साथ फसल में फुटाव भी ज्यादा होगा। दिसंबर का पहला पखवाड़ा सूखी ठंड में ही बीत गया था। धुंध व वर्षा नहीं होने के कारण गेहूं की फसल में फुटाव भी कम हुआ था।
एक्यूआइ में हुआ सुधार
वर्षा होने से एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआइ) में काफी सुधार हुआ है। एक्यूआइ 400 के पार पहुंचने के कारण पिछले सप्ताह एनसीआर में दोबारा ग्रैप-4 लागू हो गया था। वर्षा होने से आसमान में जमा प्रदूषण के कण धुल गए। पेड़ों के पत्तों पर जमा धूल भी हट गई। पत्तों पर धूल जमने की वजह से पेड़-पौधे पूरी क्षमता से कार्बन डाइआक्साइड लेकर आक्सीजन नहीं छोड़ पाते हैं।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की साइट पर पिछले नौ दिन से एक्यूआइ का डाटा उपलब्ध नहीं है। हालांकि वर्षा के बाद वातावरण में फर्क साफ नजर आ रहा है। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कृषि विज्ञान केंद्र पिंडारा के मौसम विशेषज्ञ डा. राजेश कुमार ने बताया कि जिले में मध्यम वर्षा हुई है। इससे गेहूं की फसल में सिंचाई की पूर्ति होगी और फुटाव व बढ़वार अच्छी होगी।