न्यूज कुंज, उचाना। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग हरियाणा तथा कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) जींद के संयुक्त तत्वावधान में गांव बुडायन गांव (Uchana news) में प्राकृतिक खेती जागरूकता एवं प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर प्राकृतिक खेती की आधुनिक, वैज्ञानिक एवं टिकाऊ तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र की विशेषज्ञ डॉ. प्रीति मलिक ने कहा कि प्राकृतिक खेती वर्तमान समय की आवश्यकता है। इससे खेती की लागत में कमी आती है, मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है तथा जल एवं पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। उन्होंने किसानों को रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी देते हुए प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. प्रीति मलिक ने किसानों को बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत, वाफसा, मल्चिंग (आच्छादन) तथा प्राकृतिक कीट एवं रोग प्रबंधन जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों के बारे में विस्तार से बताया। डॉ. मलिक ने कहा कि प्राकृतिक खेती से उत्पादित फसलों की गुणवत्ता बेहतर होती है और किसानों को लंबे समय में अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त होता है।
Uchana news : खेती से जुड़ी योजनाओं की दी जानकारी
शिविर में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के कृषि पर्यवेक्षक केशव ने विभाग द्वारा संचालित प्राकृतिक खेती से जुड़ी योजनाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा प्रोत्साहन सुविधाओं की जानकारी किसानों को दी। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाकर उत्पादन लागत कम करने और आय बढ़ाने का आह्वान किया। इस दौरान किसानों ने खेती से संबंधित विभिन्न समस्याएं और जिज्ञासाएं विशेषज्ञों के समक्ष रखीं, जिनका समाधान मौके पर किया गया।
किसानों ने प्राकृतिक खेती के प्रति गहरी रुचि दिखाई और अपने खेतों में इसे अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के अंत में विभागीय अधिकारियों ने उपस्थित किसानों एवं ग्रामीणों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे जागरूकता एवं प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने की बात कही।


