Jind news : जंग का असर, विदेशी मटीरियल नहीं पहुंचने से जींद में 10 करोड़ का सिंथेटिक ट्रैक निर्माण अटका

Sonia kundu
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न्यूज कुंज नेटवर्क, जींद। हरियाणा के जींद शहर में (Jind news) सफीदों रोड स्थित एकलव्य स्टेडियम में बन रहे सिंथेटिक ट्रैक का काम रुका हुआ है। सिंथेटिक ट्रैक का सामान विदेश से आना है। लेकिन अमेरिका- इजरायल और ईरान के बीच चली जंग की वजह से सामान नहीं पहुंच पाया। एजेंसी ने सामान की शिपिंग भी करवाई हुई है। नगर परिषद अधिकारियों का कहना है, अब स्थिति सामान्य हो चुकी है, इसलिए जल्द ही सामान पहुंचने की उम्मीद है।

बता दें कि करीब पौने 10 करोड़ रुपये की लागत से सिंथेटिक ट्रैक बनेगा। इसका 40 प्रतिशत काम हुआ है और एजेंसी को दिसंबर तक काम पूरा करना है। जो 40 प्रतिशत काम हुआ है, उसमें ट्रैक पर पत्थर डालकर दो लेयर बिछाई जा चुकी हैं। अब इसके ऊपर सिंथेटिक ट्रैक बनाने के लिए विशेष तरल (लिक्विड) का प्रयोग करके एक और लेयर बिछाई जानी है। जिसे पालीयुरेथेन या लेटेक्स ग्लू कहते हैं। इसे रबर के छोटे दानों के साथ मिलाकर बिछाया जाता है। जो सूखकर एक मजबूत और लचीली सतह बन जाती है।

Jind news : जिले में केवल नरवाना में ही है सिंथेटिक ट्रैक

जिले में फिलहाल नरवाना के नवदीप स्टेडियम में ही सिंथेटिक ट्रैक है। जींद शहर व बाकी जिले के खिलाड़ियों को सिंथेटिक ट्रैक पर अभ्यास करने के लिए नरवाना या रोहतक जाना पड़ता है। खिलाड़ियों की मांग पर चार साल पहले डिप्टी स्पीकर डा. कृष्ण मिढ़ा ने एकलव्य स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक बनाने की सरकार की स्वीकृति दिलवाई थी। तब करीब छह करोड़ रुपये स्वीकृत हुआ था। लेकिन एस्टीमेट नौ करोड़ रुपये से ज्यादा का बन गया था।

Jind News Impact of the conflict construction of synthetic track stalled
Jind News Impact of the conflict construction of synthetic track stalled

बढ़े हुए बजट की डिप्टी स्पीकर ने स्वीकृत करवाया। उसके बाद सिंथेटिक ट्रैक की ड्राइंग व अन्य प्रक्रियाओं में समय लग गया। पिछले साल सिंथेटिक ट्रैक बिछाने का काम शुरू हुआ। ये सिंथेटिक ट्रैक 400 मीटर लंबा और 12 फीट चौड़ा होगा। एथलीट इस ट्रैक पर दौड़, लंबी कूद, ऊंची कूद, भाला फेंक और शाटपुट का अभ्यास कर सकेंगे।

Jind news : सिंथेटिक ट्रैक बिछाने की ये होती है प्रक्रिया

सिंथेटिक ट्रैक बिछाने में मुख्य रूप से लिक्विड का उपयोग किया जाता है। सबसे पहले डामर या कंक्रीट का मजबूत और समतल आधार तैयार किया जाता है। उसके बाद बेस लेयर पर पालीयुरेथेन लिक्विड और काले रबर के दानों को एक साथ मिलाकर बिछाया जाता है। खिलाड़ियों के घुटनों को झटकों से बचाने के लिए एक और लेयर लिक्विड की डाली जाती है। आखिर में रंगीन ईपीडीएम (एथिलीन प्रोपलीन डायन मोनोमर) के दानों को ऊपर से डाला जाता है। ताकि ट्रैक फिसलन-रोधी और आकर्षक बन सके।

शहर में एकलव्य स्टेडियम और अर्जुन स्टेडियम में रनिंग ट्रैक हैं। एकलव्य स्टेडियम में निर्माणाधीन सिंथेटिक ट्रैक के कारण खिलाड़ी यहां दौड़ का अभ्यास नहीं कर पा रहे। अर्जुन स्टेडियम में ही खिलाड़ी दौड़ने के लिए आते हैं। बरसाती सीजन में अर्जुन स्टेडियम में पानी भर जाता है, जिसके कारण धावकों को दिक्कत होती है। अगर सिंथेटिक ट्रैक का काम तय समय में पूरा नहीं हो पाता है, तो खिलाड़ियों को और ज्यादा समय तक परेशानी झेलनी होगी।

Jind news : एजेंसी को जल्द सामान मंगवा कर काम पूरा करने के लिए कहा है : एक्सईएन

नगर परिषद कार्यकारी अभियंता जयवीर ने कहा कि सिंथेटिक ट्रैक का कुछ मटेरियल किसी दूसरे देश से आना है। एजेंसी ने मटेरियल आर्डर भी किया हुआ है। लेकिन कुछ देशों के बीच चली लड़ाई के कारण सामान नहीं पहुंच पाया। अब स्थिति सामान्य हो रही है, तो जल्द ही ये सामान पहुंचने की उम्मीद है। एजेंसी को बोला गया है, जल्द सामान मंगवा कर सिंथेटिक ट्रैक को निर्धारित समय में तैयार किया जाए।

एकलव्य स्टेडियम में जल्द ही सिंथेटिक ट्रैक का निर्माण होना चाहिए। सिंथेटिक ट्रैक अभी सिर्फ जींद जिले में नरवाना में ही है। हालांकि शहर में खिलाड़ियों के लिए दो स्टेडियम हैं, जिसमें से एकलव्य स्टेडियम में अभी ट्रैक बन रहा है। वहीं अर्जुन स्टेडियम में वर्षा के दौरान ट्रैक पर पानी जमा हो जाता है।
–अश्वनी, खिलाड़ी।

एकलव्य स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक बनने पर शहर के खिलाड़ियों को बेहतर खेल सुविधाएं मिल पाएंगी। उम्मीद , जल्द ही ट्रैक बनकर तैयार हो जाएगा। इसके बाद खिलाड़ी ट्रैक पर अभ्यास कर पाएंगे। अभी एकलव्य स्टेडियम में एथलेटिक्स खिलाड़ियों को अभ्यास करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है। दौड़ के लिए खिलाड़ी स्टेडियम के अंदर बनी सड़क या मुख्य सफीदों रोड पर अभ्यास करते हैं।
–निखिल, खिलाड़ी। 

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