न्युज कुंज (Jind news) : जींद के सिविल अस्पताल में आजकल बंदरों ने आतंक मचाना शुरू कर दिया है। सोमवार को सिविल अस्पताल के कार्यालय खुले तो टीकाकरण विभाग के कार्यालय में बंदरों ने जमकर तोड़फोड़ की हुई थी। सुबह भी बंदर कार्यालयों में मिले। यहां कई कंप्यूटर को तोड़ रखा था तो फर्श पर फाइलें बिखरी पड़ी थी। इसके अलावा पर्दे तोड़कर नीचे पड़े हुए थे।
बंदर इन कार्यालयों में शीशे तोड़कर घुसे थे। लगातार बंदरों के आतंक से स्वास्थ्य विभाग को नुकसान उठाना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने 2020 से लेकर अब तक नगर परिषद व डीसी को 44 बार पत्र लिखकर बंदरों के आतंक से मुक्ति दिलाने की मांग की है। स्वास्थ्य सुपरवाइजर संघ के प्रधान राममेहर वर्मा ने बताया कि 2020 से लगातार नगर परिषद को पत्र लिखे जा रहे हैं कि अस्पताल में बंदरों का आतंक है और आए दिन बंदर किसी न किसी को काट रहे हैं। इसके अलावा कार्यालयों के अंदर पहुंच कर भी नुकसान पहुंचा रहे हैं लेकिन इस समस्या पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया है।
Jind news : आफिस में रखे कंप्यूटर, रिकार्ड को बंदरों ने किया नष्ट
सोमवार को कार्यालय में रखे कंप्यूटर व रिकार्ड को भी बंदरों ने नष्ट कर दिया। अस्पताल परिसर में बंदरों की संख्या इतनी है कि इन्हें भगाना भी नामुमकिन है। झुंड के झुंड बंदरों के नागरिक अस्पताल में हर समय बैठे देखे जा सकते हैं। इसके अलावा अस्पताल में आने वाले मरीजों को भी बंदर काटने से चुकते नहीं हैं। कई बार तो बंदर नागरिक अस्पताल में दाखिल मरीजों के बिस्तर पर पहुंच कर मरीज को घायल कर चुके हैं और अनेक बार कमरों में घुसकर कंप्यूटर समेत रिकार्ड को नष्ट भी कर चुके हैं।

बंदर पकड़ने वाली टीम नागरिक अस्पताल में आई थी। बार-बार गुहार लगाए जाने के बाद 23 फरवरी को 14 बंदर, तीन मार्च को आठ बंदर, पांच बंदरों को पकड़ा था। इसके बाद दोबारा टीम कभी नहीं आई। अब फिर से 44वां रिमाइंडर भेजा है।
Jind news : दो साल से अभियान बंद, बंदर पकड़ने के मामले में विजिलेंस जांच चल रही
नगर परिषद ने साल 2023 में शहर से बंदर पकड़ने का ठेका दिया था। एजेंसी ने पांच हजार से ज्यादा बंदर पकड़ने का दावा किया था। वार्ड 31 के पार्षद संजय गोयल व अन्य कुछ पार्षदों ने गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए कहा था, एजेंसी जितने बंदर पकड़ने का दावा कर रही है, वो गलत है। अगर पांच हजार से ज्यादा बंदर पकड़े गए हैं, तो शहर से बंदरों की संख्या कम क्यों नहीं हुई।
पार्षदों की मांग पर डिप्टी स्पीकर डा. कृष्ण मिढ़ा ने पिछले साल मार्च में इस मामले की विजिलेंस जांच के लिए प्रदेश सरकार को लिखा था। जिसके बाद विजिलेंस जांच शुरू हुई थी। अब तक ये जांच पूरी नहीं हो पाई है। साल 2024 में बंदर पकड़ने का अभियान रुका था, जोकि दोबारा शुरू नहीं हो पाया। तब एजेंसी को प्रति बंदर पकड़ने का 1700 रुपये दिया गया था।
समय-समय पर नागरिक अस्पताल में बंदर पकड़ने के लिए टीम भेजी गई है। टीम ने कुछ बंदरों को पकड़ा भी है। एक बार बंदर पकड़ने के बाद फिर से बंदर आ जाते हैं। अस्पताल में एक टीम बंदर पकड़ने के लिए भेजी जाएगी।
–ऋषिकेश चौधरी, कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद।


