न्यूज कुंज। (NCR Area Jind) : राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) से जींद जिले के बाहर होने की उम्मीद जगी है। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की 16 जून को होने वाली बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा होगी। राष्ट्रीय राजधानी से 100 किलोमीटर परिधि से बाहर के जिलों को एनसीआर से बाहर करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल (वर्तमान में केंद्रीय ऊर्जा तथा आवास एवं शहरी मामले मंत्री) ने प्रयास शुरू किए थे।
जींद जिला जून 2015 में एनसीआर में शामिल किया गया था। एनसीआर में शामिल होने से जिले को कोई विशेष रूप से फायदा तो नहीं मिला। जबकि कई तरह की बंदिशें लग गई। एनसीआर में ईंट-भट्ठे एक मार्च से 30 जून तक ही चलाए जा सकते हैं। जबकि बाकी साल बंद रहते हैं। यह समयावधि राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) और सुप्रीम कोर्ट के वायु प्रदूषण नियंत्रण नियमों के तहत तय की गई है।
जिसके कारण भट्ठा संचालकों को नुकसान हो रहा है। वहीं ईंट के भी रेट महंगे हुए हैं, जिससे आमजन पर भी असर पड़ रहा है। ट्रांसपोर्टर को भी डीजल वाहनों के 10 साल तक ही चलाने की शर्त के चलते नुकसान हो रहा है। जिसके चलते जिलावासी जींद को एनसीआर से बाहर करने की लंबे समय से मांग उठा रहे हैं।
NCR Area Jind : : 10 साल में गाड़ी की किस्त भी पूरी नहीं होती
जींद ट्रक यूनियन प्रधान कृष्ण चहल ने कहा कि जींद के एनसीआर में शामिल होने के बाद ट्रांसपोर्टर पर सबसे ज्यादा मार पड़ी। गाड़ी की 10 साल में किस्त व खर्चा भी पूरा नहीं होता। 40 लाख रुपये की गाड़ी आती है। 10 साल पूरे होने के बाद वह गाड़ी चार- पांच लाख रुपये की ही रह जाती है। पहले 450 गाड़ी जींद ट्रक यूनियन में थी, अब 150 रह गई हैं। इससे व्यापारी को भी नुकसान हुआ, गाड़ी नहीं मिलती। एनसीआर से बाहर हुए, तो पांच साल अतिरिक्त मिलेंगे। इससे भाड़ा भी कम होगा। ट्रांसपोर्टर को भी बचत होगी।

आर्य सीनियर सेकेंडरी स्कूल अहिरका के संचालक वजीर ढांडा ने कहा कि एनसीआर का बजट सरकार ने खर्च नहीं किया। जिसका कोई फायदा नहीं हुआ। स्कूल बस की लाइफ 15 साल से घटकर 10 साल रह गई। जिसके कारण ट्रांसपोर्ट महंगा हुआ। एनसीआर से जींद बाहर होता है, तो स्वागत योग्य है। एनसीआर के बहुत बड़े फायदे होते हैं, इसलिए सबने खुशी मनाई थी। सिर्फ कागजों में ही एनसीआर था और बंदिशें झेलनी पड़ी। हरियाणा सरकार इसके लिए मजबूत पैरवी करे। हरियाणा सरकार जींद को अलग से बजट देकर विकसित करे।
NCR Area Jind : लेबर नहीं मिलती, कोयला भी बैन है
भट्ठा एसोएिशन जिला जींद प्रधान प्रवीन ढिल्लों ने कहा कि बंदिशें बढ़ गई। लेबर की समस्या हो गई, लेबर आनी बंद हो गई। लेबर कम समय के कारण ज्यादा रेट पर मिलती थी। जबकि बाहर के भट्ठों पर आठ से नौ माह काम मिलता है। एनसीआर में भट्ठों पर कोयला बैन है, इससे ईंट की क्वालिटी पर भी असर पड़ता है। कम माल होने की वजह से रेट में बढ़ोतरी होती है। ये गर्मी का समय होता है, इस समय लेबर काम भी नहीं कर पाती। वर्षा का सीजन भी आ जाता है। आठ से साढ़े आठ हजार रुपये प्रति एक हजार ईंट भाव है। कुछ जिलों में भाव नौ हजार तक भी भाव पहुंच चुके हैं।
NCR Area Jind : बजट तो नहीं आया, बंदिशें मिली
सामाजिक कार्यकर्ता सुनील वशिष्ठ ने कहा कि जींद को एनसीआर में शामिल करवाने के लिए सामाजिक संगठनों ने भी काफी आवाज उठाई थी। हुड्डा सरकार में एनसीआर का काफी बजट रोहतक में आया था। हमें उम्मीद थी, जींद में भी पैसा आएगा। लेकिन बंदिशें ही हिस्से आई। जिसके कारण उद्यमी भी यहां उद्योग लगाने से बचने लगे। डीजल गाड़ियाें की लाइफ 15 साल से घटकर 10 साल रह गई। जिसका ट्रांसपोर्टर से लेकर आमजन को नुकसान झेलना पड़ा।


