न्यूज कुंज, जींद (Devarad Village History) : जींद जिले के आखिरी छोर पर बसे जुलाना विधानसभा क्षेत्र के देवरड़ गांव में हर वर्ष बरसाती सीजन में फसलें डूबने के कारण बर्बाद हो रही हैं। बरसाती पानी की निकासी नहीं होने से खेत जलमग्न हो जाते हैं।
कमाच खेड़ा, मालवी, किलाजफरगढ़, ब्राह्मणवास, फरमाणा गांवों का बरसाती पानी देवरड़ के खेतों में आकर जमा हो जाता है। गांव में स्टेडियम, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। पेयजल की भी समस्या है। गांव का एक हिस्सा काफी ऊंचा है, वहां पर सप्लाई का पानी नहीं पहुंच पाता। वहां पर बूस्टर बनाने की आवश्यकता है। गांव से खेतों में जाने वाले सभी रास्ते कच्चे पड़े हैं। ग्रामीण इन रास्तों को पक्का करवाने की मांग कर रहे हैं।
Devarad Village : देवरड़ गांव का इतिहास
बुजुर्गों का कहना है, यहां महाभारत काल में कौरवों और पांडवों के कुल गुरु द्रोणाचार्य ने तपस्या की थी। उन्हीं के नाम से गांव का प्रारंभिक नाम द्रोणागढ़ पड़ा था। बाद में गांव का नाम देवरड़ कर दिया गया। गांव लगभग 700 साल पहले बसाया गया था। गांव बसने से पहले ही मंदिर बना हुआ था। गांव में बाबा श्याम जी मंदिर आस्था का केंद्र है। देवरड़ गांव की जनसंख्या 5500 के करीब है और देवरड़ गांव में साक्षरता करीब 90 प्रतिशत है।

फाल्गुन मास की द्वादशी को यहां मेला लगता है। मंदिर के पास एक तालाब बना हुआ था, जो आज भी मौजूद है। लेकिन समय के बदलाव के चलते तालाब जगह कुंड बना दिया गया है। मंदिर में मौजूद चित्रकारी और नक्कासी महाभारत कालीन राजा परीक्षित के समय की चित्रकारी से मिलती जुलती है।
Devarad Village : पेयजल समस्या का हल निकाला जाए
बुजुर्ग साधुराम ने कहा कि गांव में मूलभूत सुविधाओं की कमी है। गांव का एक हिस्सा काफी ऊंचा है। वहां पर सप्लाई का पानी नहीं पहुंच पाता। वहां पर बुस्टर बनाया जाना चाहिए। गांव में पेयजल की किल्लत रहती है। वहीं गांव से खेतों में जाने वाले सभी रास्ते कच्चे पड़े हैं। किलाजफरगढ़ से देवरड़, गोगाहेड़ी और फरमाणा का रास्ता कच्चा पड़ा है। इस रास्ते को पक्का करवाया जाए।
ग्रामीण मोनू ने कहा कि गांव में स्टेडियम नहीं है। जिसके कारण युवाओं को खेलने में दिक्कत होती है। अगर खेल सुविधाएं मिलें, तो गांव से विभिन्न खेलों में खिलाड़ी तैयार होंगे। गांव में प्राथामिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन तक नहीं है। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर किया जाना चाहिए। गांव में जलघर में माइनर का पानी डालने के लिए पाइप लाइन नहीं है। पानी का स्टोर करने के लिए जलघर में टैंक बनाया जाए।

Devarad Village : निकासी के लिए स्थायी समाधान जरूरी
सरपंच सुशील कुमारी ने बताया कि पानी की निकासी का कोई स्थाई प्रबंध नहीं है। जिसके चलते बरसाती सीजन में हर साल करीब एक हजार एकड़ फसल डूब जाती है। पिछले साल भी किसानों को फसलों में जलजमाव होने से काफी नुकसान हुआ। इस समस्या का समाधान तभी हो सकता है जब पाइप लाइन जमीन में दबे और महम माइनर के पास बनी ड्रेन में डाली जाए।


